Lrc SANGHARSH by LUCKE
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1 year ago
by
Guest
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.
[ar:LUCKE ]
[al:SANGHARSH - SINGLE]
[ti:SANGHARSH]
[au:SURYAPUTRA]
[length:03:17.38]
[by:༗]
[re:www.megalobiz.com/lrc/maker]
[ve:v1.2.3]
[00:01.21]♪♪
[00:06.28]♪♪
[00:15.35]मैं कुंती पुत्र कर्ण
[00:16.94]आज दास्तान अपनी गाता हूं।
[00:18.27]मैंने क्या क्या देखा जीवन मैं
[00:19.87]आज तुम सबको दिखलाता हुं।।
[00:21.73]दुर्वासा ऋषि की माया से
[00:23.32]मां कुंती को वरदान मिला।
[00:24.91]माता का वरदान भी मुझपे
[00:26.78]श्राप बनके हावी हुआ।।
[00:28.10]बाल्यकाल में कुंती मां ने
[00:29.96]क्यू मुझको यूं त्याग दिया।
[00:31.30]अबोध से उस बालक ने
[00:33.16]ना जाने क्या अपराध किया।।
[00:34.75]मेरी माता भी मजबूर थी
[00:36.35]कर्तव्य का निर्वाह किया।
[00:38.21]लाड़–प्यार मिलना था मुझे
[00:39.54]मां गंगा का प्रवाह मिला।।
[00:41.43]समय ने रुख यूं बदल लिया
[00:43.02]था मां कुंती की गोद में।
[00:44.35]निद्रा से आंखे खोला तो
[00:46.21]पाया गंगा के शोर में।।
[00:48.07]उस ठोकर खाते बालक को
[00:49.72]जब राधा मां ने ढूंढ लिया।
[00:51.03]मैं कुंती पुत्र कौंतये अब
[00:53.16]राधेय भी कहलाने लगा।।
[00:54.75]अब जैसे जैसे बड़ा हुआ
[00:56.11]मुझे धनुर्धारी बनना था पर।
[00:57.70]सूत पुत्र राधेय को
[00:59.56]विद्या पाना भी मुश्किल था।।
[01:01.16]अब धनुर्विद्या पाने हेतु
[01:02.75]गुरु द्रोण के पास गया।
[01:04.34]वो राजवंश को देते शिक्षा
[01:06.20]सूत को इनकार दिया।।
[01:07.80]उदासीनता चेहरे पर
[01:09.39]मुस्कान को मैं तरस गया।
[01:10.98]मैं दानवीर मैं सूर्यपुत्र
[01:12.84]जैसे जीते जी मर गया।।
[01:14.44]पिता श्री का कवच मिला पर
[01:15.77]मां का आंचल छूट गया।
[01:17.62]जो कुछ पाया जीवन में
[01:19.22]धीरे धीरे सब छूट चला।।
[01:20.87]अब क्या करता मैं हारा था
[01:22.46]मेरे सारे रास्ते बंद थे।
[01:24.06]मैं हर तरफ से मारा था
[01:25.65]टूटे सारे संबंध थे।।
[01:27.51]पहले कुंती मां ने त्याग दिया।
[01:28.85]फिर राधा मां से दूर गया।
[01:30.72]भगवान से पाई विद्या को भी
[01:32.57]अंत समय में भूल गया।।
[01:34.17]कवच कुंडल भी छूट गए
[01:35.76]मेरी पत्नी से भी दूर गया।।
[01:37.09]क्या ही किस्मत मानोगे तुम
[01:38.95]जब विद्या को ही भूल गया।।
[01:40.54]छल से पाई विद्या थी
[01:42.13]किया कोई ना पाप था।
[01:43.73]है परशुराम भगवान आपने
[01:45.63]दे दिया क्यूं श्राप था।।
[01:47.22]अगर ना दिया होता वो श्राप
[01:48.81]ना इतना कुछ मैं भोगता।
[01:50.41]उस कुरुक्षेत्र भूमि का मंजर
[01:52.26]अलग दिशा में मोड़ता।।
[01:53.86]प्रचंड बाणों के वेग से
[01:55.19]प्रलय रक्त की ला देता।
[01:57.05]प्रतंच्या खीचके धनुष की
[01:58.64]मैं त्राहि त्राहि मचा देता।।
[02:00.23]वो तो(स्वयं) वासुदेव थे सारथी
[02:01.83]ध्वजा विराजे हनुमान थे।
[02:03.42]हिला देता था रथ को भी
[02:05.01]मेरे बाणों के प्रहार से।।
[02:06.61]मैं सूर्यदेव का अंश था
[02:08.47]भीषण गर्मी मेरे बाण में।
[02:10.06]ना धंसता पहिया धरती में
[02:11.39]कर देता सबको राख मैं।।
[02:13.51]पर क्या करता मैं यारो मैं तो
[02:15.37]अपनो से ही हारा था।
[02:16.70]संघर्ष में ना साथ मिला
[02:18.56]ना किसी का सहारा था।।
[02:19.89]सूर्यदेव का पुत्र था पर
[02:21.75]अंधकार में जीवन बीता था।
[02:23.34]दुनिया को देते रोशनी
[02:25.20]क्यूं मेरे मैं अंधेरा था।।
[02:26.53]दुर्योधन ने था दिया साथ
[02:28.39]मतलब से राज्य अंग दिया।
[02:29.98]मित्रता का देके झांसा
[02:31.58]विद्या गिरवी रख लिया।।
[02:33.44]खैर किसी का कोई दोष नहीं
[02:34.76]सब अपनी जगह ठीक थे।
[02:36.36]मां कुंती का ना दोष था
[02:38.49]परशुराम भी सटीक थे।।
[02:39.59]ना गुरु द्रोण की गलती थी
[02:41.45]ना कान्हा से नाराज था।
[02:43.31]मेरी मौत का असली जिम्मेदार
[02:44.91]जाती में बंटा समाज था।।
[02:46.24]वर्णों में बटे समाज को क्यों
[02:48.36]जात–पात में बांट दिया।
[02:50.22]इस कुंती पुत्र राधेय को
[02:51.29]तुमने ही जिंदा मार दिया।।
[02:52.87]ज्येष्ठ पुत्र मां कुंती का मैं
[02:54.73]अनुज के हाथो मारा गया।
[02:56.33]किस्मत से मारा बदकिस्मत
[02:57.66]अधर्म तरफ हार गया।।
[02:59.57]कवच को भी छोड़ दिया
[03:01.43]कुंडल भी मैंने दान किए।
[03:02.76]वासुदेव के कहने पर मैंने
[03:04.62]प्राण भी अपने त्याग दिए।।
[03:06.21]समाज ने ठुकराया था मुझे
[03:07.54]मेरे ज्ञान का ना मोल मिला।
[03:09.66]गांडीव के प्रहार से
[03:10.99]संसारी दुनिया छोड़ चला।।
[03:13.12]♪♪
[al:SANGHARSH - SINGLE]
[ti:SANGHARSH]
[au:SURYAPUTRA]
[length:03:17.38]
[by:༗]
[re:www.megalobiz.com/lrc/maker]
[ve:v1.2.3]
[00:01.21]♪♪
[00:06.28]♪♪
[00:15.35]मैं कुंती पुत्र कर्ण
[00:16.94]आज दास्तान अपनी गाता हूं।
[00:18.27]मैंने क्या क्या देखा जीवन मैं
[00:19.87]आज तुम सबको दिखलाता हुं।।
[00:21.73]दुर्वासा ऋषि की माया से
[00:23.32]मां कुंती को वरदान मिला।
[00:24.91]माता का वरदान भी मुझपे
[00:26.78]श्राप बनके हावी हुआ।।
[00:28.10]बाल्यकाल में कुंती मां ने
[00:29.96]क्यू मुझको यूं त्याग दिया।
[00:31.30]अबोध से उस बालक ने
[00:33.16]ना जाने क्या अपराध किया।।
[00:34.75]मेरी माता भी मजबूर थी
[00:36.35]कर्तव्य का निर्वाह किया।
[00:38.21]लाड़–प्यार मिलना था मुझे
[00:39.54]मां गंगा का प्रवाह मिला।।
[00:41.43]समय ने रुख यूं बदल लिया
[00:43.02]था मां कुंती की गोद में।
[00:44.35]निद्रा से आंखे खोला तो
[00:46.21]पाया गंगा के शोर में।।
[00:48.07]उस ठोकर खाते बालक को
[00:49.72]जब राधा मां ने ढूंढ लिया।
[00:51.03]मैं कुंती पुत्र कौंतये अब
[00:53.16]राधेय भी कहलाने लगा।।
[00:54.75]अब जैसे जैसे बड़ा हुआ
[00:56.11]मुझे धनुर्धारी बनना था पर।
[00:57.70]सूत पुत्र राधेय को
[00:59.56]विद्या पाना भी मुश्किल था।।
[01:01.16]अब धनुर्विद्या पाने हेतु
[01:02.75]गुरु द्रोण के पास गया।
[01:04.34]वो राजवंश को देते शिक्षा
[01:06.20]सूत को इनकार दिया।।
[01:07.80]उदासीनता चेहरे पर
[01:09.39]मुस्कान को मैं तरस गया।
[01:10.98]मैं दानवीर मैं सूर्यपुत्र
[01:12.84]जैसे जीते जी मर गया।।
[01:14.44]पिता श्री का कवच मिला पर
[01:15.77]मां का आंचल छूट गया।
[01:17.62]जो कुछ पाया जीवन में
[01:19.22]धीरे धीरे सब छूट चला।।
[01:20.87]अब क्या करता मैं हारा था
[01:22.46]मेरे सारे रास्ते बंद थे।
[01:24.06]मैं हर तरफ से मारा था
[01:25.65]टूटे सारे संबंध थे।।
[01:27.51]पहले कुंती मां ने त्याग दिया।
[01:28.85]फिर राधा मां से दूर गया।
[01:30.72]भगवान से पाई विद्या को भी
[01:32.57]अंत समय में भूल गया।।
[01:34.17]कवच कुंडल भी छूट गए
[01:35.76]मेरी पत्नी से भी दूर गया।।
[01:37.09]क्या ही किस्मत मानोगे तुम
[01:38.95]जब विद्या को ही भूल गया।।
[01:40.54]छल से पाई विद्या थी
[01:42.13]किया कोई ना पाप था।
[01:43.73]है परशुराम भगवान आपने
[01:45.63]दे दिया क्यूं श्राप था।।
[01:47.22]अगर ना दिया होता वो श्राप
[01:48.81]ना इतना कुछ मैं भोगता।
[01:50.41]उस कुरुक्षेत्र भूमि का मंजर
[01:52.26]अलग दिशा में मोड़ता।।
[01:53.86]प्रचंड बाणों के वेग से
[01:55.19]प्रलय रक्त की ला देता।
[01:57.05]प्रतंच्या खीचके धनुष की
[01:58.64]मैं त्राहि त्राहि मचा देता।।
[02:00.23]वो तो(स्वयं) वासुदेव थे सारथी
[02:01.83]ध्वजा विराजे हनुमान थे।
[02:03.42]हिला देता था रथ को भी
[02:05.01]मेरे बाणों के प्रहार से।।
[02:06.61]मैं सूर्यदेव का अंश था
[02:08.47]भीषण गर्मी मेरे बाण में।
[02:10.06]ना धंसता पहिया धरती में
[02:11.39]कर देता सबको राख मैं।।
[02:13.51]पर क्या करता मैं यारो मैं तो
[02:15.37]अपनो से ही हारा था।
[02:16.70]संघर्ष में ना साथ मिला
[02:18.56]ना किसी का सहारा था।।
[02:19.89]सूर्यदेव का पुत्र था पर
[02:21.75]अंधकार में जीवन बीता था।
[02:23.34]दुनिया को देते रोशनी
[02:25.20]क्यूं मेरे मैं अंधेरा था।।
[02:26.53]दुर्योधन ने था दिया साथ
[02:28.39]मतलब से राज्य अंग दिया।
[02:29.98]मित्रता का देके झांसा
[02:31.58]विद्या गिरवी रख लिया।।
[02:33.44]खैर किसी का कोई दोष नहीं
[02:34.76]सब अपनी जगह ठीक थे।
[02:36.36]मां कुंती का ना दोष था
[02:38.49]परशुराम भी सटीक थे।।
[02:39.59]ना गुरु द्रोण की गलती थी
[02:41.45]ना कान्हा से नाराज था।
[02:43.31]मेरी मौत का असली जिम्मेदार
[02:44.91]जाती में बंटा समाज था।।
[02:46.24]वर्णों में बटे समाज को क्यों
[02:48.36]जात–पात में बांट दिया।
[02:50.22]इस कुंती पुत्र राधेय को
[02:51.29]तुमने ही जिंदा मार दिया।।
[02:52.87]ज्येष्ठ पुत्र मां कुंती का मैं
[02:54.73]अनुज के हाथो मारा गया।
[02:56.33]किस्मत से मारा बदकिस्मत
[02:57.66]अधर्म तरफ हार गया।।
[02:59.57]कवच को भी छोड़ दिया
[03:01.43]कुंडल भी मैंने दान किए।
[03:02.76]वासुदेव के कहने पर मैंने
[03:04.62]प्राण भी अपने त्याग दिए।।
[03:06.21]समाज ने ठुकराया था मुझे
[03:07.54]मेरे ज्ञान का ना मोल मिला।
[03:09.66]गांडीव के प्रहार से
[03:10.99]संसारी दुनिया छोड़ चला।।
[03:13.12]♪♪
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